बेनीपट्टी शौचालय 6 अक्टूबर - सुनते ही जेहन में वह भीड़ जरुर याद आती है जिसमें बेनीपट्टी थाने की जमीन कम लोगों का सिर अधिक दिख रहा था. जिस बंदी में बेनीपट्टी के तमाम दुकानें स्वतः बंद हुई थी. सड़कों पर हजारों लोग थे जो एक आन्दोलन-जिद्द और संघर्ष का परिणाम था. दर्जनों लोगों पर दर्जनों धाराओं में मुकदमा हुआ था. आज यह याद दिलाने का कारण यह है कि बेनीपट्टी में थाने के घेराबंदी चल रही है. घेरा बंदी की दीवाल बेनीपट्टी मुख्यालय के एकमात्र सार्वजनिक शौचालय तक पंहुची है जिसे बेनीपट्टी प्रशासन घेराबंदी करके थाने के अंदर लेने की कवायद कर रही है. अगर ऐसा हो जाता है तो यह शौचालय थाने के कब्जे में चला जायेगा - जिसका लाभ पुलिसकर्मियों और उनके परिवार वालों के अलावे किसी को नहीं मिलेगा. थाने के गेट से अंदर जाने पर पुलिसकर्मियों की गालियां मिलेगी. हो सकता है इस आशंका पर अभी प्रशासन से यह जवाब मिले कि कोई रोक नहीं होगा थाने के गेट से शौचालय के अंदर जाने के लिए. लेकिन जो अधिकारी यह वादा करेंगे वह चंद महीनों सालों में दुसरे जगह तबादला होकर चले जायेंगे और इसका खामियाजा यहां की जनता को भुगतना पड़ेगा. जबसे यह जानकारी मिली है मन में आक्रोश है - बहुत संघर्ष के बाद बेनीपट्टी को यह सार्वजनिक शौचालय नसीब हुआ है इसको अपने कब्जे में लेना इतना आसान नहीं होगा प्रशासन के लिए.
आप लोग राय दें क्या प्रशासन जो कर रही है वह सही है ?

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