शनिवार, 21 अप्रैल 2018

अभी सिलिंडर बांटने का मौसम है ग़ालिब... की हमें डिस्टर्ब ना करो


अभी सिलिंडर बांटने का मौसम है ग़ालिब... की हमें डिस्टर्ब ना करो

मैथिली को अष्टम अनुसूची में स्थान मिलने के बाद अक्सर इसका क्रेडिट-डेबिट लेने वाले सिलिंडर डिस्ट्रीब्यूटर भाजपाई ना जाने किस बिल में घुसे पड़े हैं। सिलिंडर बांटने के मौसम में अखबार के किसी कोने में आने की चाहत ने सभी को देशी झबड़ा बना दिया है। मिथिला मैथिली के मंच पर पाग-डोपटा धारण कर पान माछ मखान, मंडन अयाची गान, कालिदास विद्यापति लोरिक सल्हेश दुलरा दयाल का नाम लेकर भौकाली टाइट करने वाले सभी सतरंगी मोदी भक्त लोकसभा का टिकट फाइनल करने में लगे हुए हैं। लेकिन उन झबड़ों को कौन याद दिलाएगा की जिस मिथिला का तुम नाम बेचकर राजनीति करते हो, जिस श्री राम का नाम लेकर तुम भागलपुर, सीतामढ़ी में रामनवमी जैसे माहौल में तलवार से कीर्तन करते हो उसी श्री राम की अर्धांग्नी सीता की धरती मां मिथिला के पुत्र हो तुम। 

और उसी मिथिला की भाषा मैथिली के साथ खिलवाड़ हो रहा है। तुम्हारी भाषा को बोली कहकर अपमानित किया जा रहा है और तुम सिलिंडर बांटने के बहाने सरेंडर कर चुके हो।  

खैर तुम्हारी मजबूरियों को भी हम समझते हैं। अखबार के विरुद्ध इस आंदोलन में आना तुम्हारे लिए क्या तुम्हारे अड़ोसी-पड़ोसी के लिए भी आसान नहीं है। क्योंकि जिस मंदिर के तुम पुजारी हो और जिस प्रसाद के लिए तुम पिछले 4 साल से जय श्री राम.. जय श्री राम का नारा लगा रहे हो उसका प्रसाद वितरण का समय नजदीक आ चुका है। अगर कल तुम्हे प्रसाद मिल जाता है और प्रसाद प्राप्त करने की खबरें अगर अखबार में नहीं छपती है तो तुम प्राण भी त्याग सकते हो। खैर तुम ही नहीं तुम्हारा अड़ोसी-पड़ोसी और पहरेदार भी छपास रोग से ग्रसित हैं। कुछ नहीं कर सकते हो अगर तो कम से कम शर्म कर लो...  

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